Indian Inventor and their Invention
भारत में कई ऐसे अविष्कारक हो चुके है जिनके कार्य अविस्मरणीय है लेकिन समय के साथ साथ उन्हे भुला दिया गया और पाश्चात्य संस्कृति के आकषर्ण मे हम हमरी अभूतपूर्ण उपलब्धियों को भूलकर विदेशियों के बारे में पढ़ते गाए, लेकिन हमारे भारतीय शास्त्रों मे ही ऐसे अकल्पनीय आविष्कार छुपे हुवे है, जो हमे हैरान करते है और हमे गर्व के साथ साथ ही उन्हे भुलाने के लिए शर्म का एहसास कराते है।
१) सुश्रुत
शल्य चिकित्सा (Surgery) के पितामह और 'सुश्रुत संहिता' के प्रणेता आचार्य सुश्रुत सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। उनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है।
सुशृत
जन्म ८०० ई.पू.,भारत।
२) कणाद ऋषि
भौतिक जगत की उत्पत्ति सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण परमाणुओं(atom) के संघनन(मॉलिक्यूल) से होती है- इस सिद्धांत के जनक महर्षि कणाद थे।
इसके अलावा महर्षि कणाद ने ही न्यूटन से पूर्व गति के तीन नियम बताए था। वेग या मोशन (motion) पांचों द्रव्यों पर निमित्त व विशेष कर्म के कारण उत्पन्न होता है तथा नियमित दिशा में क्रिया होने के कारण संयोग विशेष से नष्ट होता है या उत्पन्न होता है।
स्वतंत्र भौतिक विज्ञानवादी दर्शन प्रकार के आत्मदर्शन के विचारों का सबसे पहले महर्षि कणाद ने सूत्र रूप में लिखा।
कणाद ऋषि
जन्म ६००-४००ई.पु., भारत
३) बोधायान
बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र तथा श्रौतसूत्र के रचयिता थे।ज्यामिति के विषय में प्रमाणिक मानते हुए सारे विश्व में यूक्लिड की ही ज्यामिति पढ़ाई जाती है। मगर यह स्मरण रखना चाहिए कि महान यूनानी ज्यामितिशास्त्री यूक्लिड से पूर्व ही भारत में कई रेखागणितज्ञ ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज कर चुके थे, उन रेखागणितज्ञों में बौधायन का नाम सर्वोपरि है। उस समय भारत में रेखागणित या ज्यामिति को शुल्व शास्त्रभी कहा जाता था।
समकोण त्रिभुज से सम्बन्धित पाइथागोरस प्रमेय सबसे पहले महर्षि बोधायन की देन है। पायथागोरस का जन्म तो ईसा के जन्म के 8 वी शताब्दी पहले हुआ था जबकि हमारे यहाँ इसे ईसा के जन्म के 15 वी शताब्दी पहले से ही ये पढ़ायी जाती थी
बोधायन
जन्म १५०० ई.पु., भारत
४)रामानुजन
रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। इनका उनका वह पुराना रजिस्टर जिस पर वे अपने प्रमेय और सूत्रों को लिखा करते थे 1976 में अचानक ट्रिनीटी कॉलेज के पुस्तकालय में मिला। करीब एक सौ पन्नों का यह रजिस्टर आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इस रजिस्टर को बाद में रामानुजन की नोट बुक के नाम से जाना गया। मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान द्वारा इसका प्रकाशन भी किया गया है।इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। इन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, फिर भी इन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए। इन्होंने अपने प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए।
श्रीनिवास रामानुजन् इयंगर
जन्म १८८७, भारत
५)आर्यभट
प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है।उन्होंने आर्यभटीय नामक महत्वपूर्ण ज्योतिष ग्रन्थ लिखा, जिसमें वर्गमूल, घनमूल, समान्तर श्रेणी तथा विभिन्न प्रकार के समीकरणों का वर्णन है। उन्होंने अपने आर्यभटीय नामक ग्रन्थ में कुल ३ पृष्ठों के समा सकने वाले ३३ श्लोकों में गणितविषयक सिद्धान्त तथा ५ पृष्ठों में ७५ श्लोकों में खगोल-विज्ञान विषयक सिद्धान्त तथा इसके लिये यन्त्रों का भी निरूपण किया।
आर्यभटीय के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति शामिल हैं। इसमे सतत भिन्न (कँटीन्यूड फ़्रेक्शन्स), द्विघात समीकरण (क्वाड्रेटिक इक्वेशंस), घात श्रृंखला के योग (सम्स ऑफ पावर सीरीज़) और ज्याओं की एक तालिका (Table of Sines) शामिल हैं।
और शून्य के अविष्कारक भी आर्यभट्ट ही थे।
आर्यभट
जन्म ४७३-५५०, भारत
६)सुभाष मुखोपाध्याय
एक भारतीय वैज्ञानिक, हजारीबाग, बिहार और उड़ीसा प्रांत, ब्रिटिश भारत (अब झारखंड, भारत में) के चिकित्सक थे, जिन्होंने इन-विट्रो निषेचन(फर्टिलाइजेशन) का उपयोग करके दुनिया का दूसरा और भारत का पहला बच्चा बनाया। 1978 में यूनाइटेड किंगडम कनुप्रिया अग्रवाल (दुर्गा) का जन्म यूनाइटेड किंगडम में पहले आईवीएफ बच्चे के ठीक 67 दिन बाद हुआ था।बाद में डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को तत्कालीन पश्चिम बंगाल राज्य सरकार और भारत सरकार ने परेशान किया और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ अपनी उपलब्धियों को साझा करने की अनुमति नहीं दी । मायूस होकर उन्होंने 19 जून 1981 को आत्महत्या कर ली।
Test tube baby के यह पहले भारतीय वैज्ञानिक अविष्कारक थे।
सुभाष मुखोपाध्याय
जन्म १९३१,भारत
७)शिवकर बापूजी तलपड़े
सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट के कला और शिल्प विभाग में एक भारतीय तकनीकी प्रशिक्षक थे, जिन्होंने 1895 में पहले विमान का निर्माण किया। तलपड़े मुंबई में रहते थे और संस्कृत साहित्य और वेदों का अध्ययन करते थे।तलपड़े के विमान का नाम मारुत्सखा था, जो संस्कृत मारुत ('एयर' या 'स्ट्रीम') और सखा ('मित्र') से लिया गया था, जिसका अर्थ है 'हवा का मित्र'। जैसा कि प्राचीन भारत में डी के कंजीलाल की १९८५ विमना ने सुझाव दिया था: प्राचीन भारत में हवाई जहाज या फ्लाइंग मशीनें, मारुत्सखा को विमना से प्रेरित किया गया है, जो हिंदू महाकाव्यों में प्राचीन उड़ान मशीनों से प्रेरित है ।आर्ट स्कूल में तलपड़े के छात्रों में से एक, श्रीपाद दामोदर सतवलेकर ने लिखा कि मारुसखा ने कुछ मिनटों के लिए उड़ान जारी रखी। "एक प्रसिद्ध भारतीय न्यायाधीश और एक राष्ट्रवादी, महादेव गोविंदा रानाडे और एच एच सयाजी राव गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक जिज्ञासु विद्वानों के दर्शकों ने क्रमशः ' मारुत्सक्थी ' के रूप में नामित मानव रहित विमान को देखने के लिए सौभाग्य था, 1500 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरें और फिर पृथ्वी पर गिर जाएं"। यह एक खेल कार्यक्रम की तरह था।
शिवकर बापूजी तलपडे
जन्म १८६४,भारत
८)चाणक्य
चाणक्य/कौटिल्य, मौर्य साम्राज्य के महामंत्री थे। उन्होंने कूटनीति, राजनीति, और अर्थशास्त्र में अभूतपूर्व योगदान दिए है। वह भारत के अर्थशास्त्र के जनक है। उनकी नीतियों को सदियों बाद आज भी पढ़ा जाता है और उस पर अध्ययन भी होता है। अखंड भारत का प्रण लेना वाले और उस तरफ प्रयत्नशील होने वाले पहले क्रांतिकारी थे। दुनिया की पहली विद्यापीठ तक्षशिला के प्राचार्य भी थे।चाणक्य
जन्म ई.पु.३७६, भारत
९) जीडी नायडू (गोपालस्वामी डोरैस्वामी नायडू)
एक भारतीय आविष्कारक और इंजीनियर थे जिन्हें "एडिसन ऑफ इंडिया" और "कोयंबटूर के धन निर्माता" के रूप में जाना जाता है। उन्हें भारत में पहली इलेक्ट्रिक मोटर के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। नायडू ने स्वतंत्र रूप से आंतरिक दहन चार स्ट्रोक इंजन विकसित किया। उनके पास केवल प्राथमिक शिक्षा थी लेकिन बहुमुखी प्रतिभा के रूप में उत्कृष्ट थे।G.D. नायडू
जन्म १८९३, भारत
१०)शंकर अबाजी भिसे
डॉ शंकर अबाजी भिसे भारत के एक वैज्ञानिक एवं अग्रणि आविष्कारक थे जिन्होने २०० के लगभग आविष्कार किये। उन्होने लगभग ४० आविष्कारों पर पेटेन्ट लिया था। उन्हें "भारतीय एडिसन" कहा जाता है। उन्होने भारतीय मुद्रण प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे छपाई की गति पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ायी जा सकी।उन्होंने बॉम्बे में एक वैज्ञानिक क्लब की स्थापना की और, अपने शुरुआती 20 के दशक तक, गैजेट्स और मशीनों की एक आस्तीन डिजाइन करना शुरू किया: टैम्पर प्रूफ बोतलें, विद्युत साइकिल विरोधाभास, बॉम्बे के उपनगरीय रेलवे प्रणाली के लिए एक स्टेशन संकेतक।1905 में, उन्होंने "बस्ट-इंप्रूवमेंट डिवाइस" के लिए एक प्रोटोटाइप पुश-अप ब्रा, लिए पेटेंट कराया।भिसी का सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार संबंधित मुद्रण: भिसोटाइप, एक टाइपेस्टर जिसने मुद्रण उद्योग में क्रांति लाने का वादा किया था।यह जल्दी और सस्ते में धातु के प्रकार का उत्पादन किया - पुस्तकों और अखबारों को प्रिंट करने के लिए उपयोग किया जाता है -और यह उस समय के उद्योग के नेताओं की तुलना में बहुत तेज और अधिक कुशलता से किया
शंकर आबाजी भिशीज
जन्म१८६७, भारत
११) भास्कराचार्य
भास्कराचार्य ने विज्ञान से जुड़ी कई कई खोज किए है।इनमें ग्रहों के मध्य व यथार्थ गतियां काल, दिशा, स्थान, ग्रहों के उदय, सूर्य एवं चन्द्रग्रह, सूर्य की गति, ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण व शक्ति संबंधित कई खोज शामिल है। वैसे तो ये बात हर कोई जानता है कि गुरुत्वाकर्षण की खोज करने वाले न्यूटन है लेकिन इस बात को बहुत कम लोग ही जानते है कि संसार के सामने गुरुतवाकर्षण को लाने वाले सर्वप्रथम वैज्ञानिक भास्कराचार्य थे.गणित में भी भारकराचार्य का मुख्य योगदान है। उन्होने सारणियां, संख्या प्रणाली भिन्न, त्रैराशिक, श्रेणी, क्षेत्रमितीय, अनिवार्य समीकरण जोड़-घटाव, गुणा-भाग, अव्यक्त संख्या व सारिणी, घन, क्षेत्रफल के साथ-साथ शून्य की प्रकृति का विस्तृत ज्ञान दिया । इनहोने पायी का गान 3.14166 निकाला, जो वास्तविक मान के बहुत करीब है । भास्कराचार्य द्वारा खोजी गयी तमाम विधियां आज भी बीजगणित की पाठ्?यपुस्सकों में मिलती हैं ।भास्कराचार्य
जन्म १११४, भारत
मैने उपरोक्त सभी अविस्मरनिय आविष्कारकों के जन्म के वर्ष के साथ मृत्यू के वर्ष का उल्लेख नहीं किया, क्यो के वह अपने कर्यो की वजह अमरत्व हासिल कर चुके है।
इसपर आपके विचार एवं सुझाव comment box में जरूर दर्ज करे।
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