Stories Created or Marketed

 We have many marvelous freedom fighters, social worker, nationalists and authors, who have created history, who's life are now stories of courage, braveries, hard word, sacrifice, success and dedication.

 But how many of them we know or how many of them we follow. They created the history and we created stories of them. Their dedication never demand any popularity or no credits for their work. But we marketed them very well. They all have different paths but destination was similar, but now a days we have devided them for their different paths. This the system of belief changed heros are been created and marketed very well for some cause.

  इस धारणाओं को समझते है, आप गांधीजी, नेहरूजी को मानने वालो मे से है? या आप  बोसजी को मानने वालो मे से है, या आप भगत सिंग, चंद्रशेखर आजाद के क्रांतिकारी विचारों को मानने वालो मे से है?, या आप शास्त्री जी, सरदार वल्लभ पटेल जी को मानने वालो मे से है?, सावरकर जी, या अम्बेडकर जी को मानने वालों में से है? मेरा यह सवाल शायद बाहरी दुनिया को अटपटा सा लगे, लेकिन भारतीय बुद्धिजीवियों के समझ में आया ही होगा, के इस सवाल मे अलग अलग गुटों के बारे पूछा है, लोगो को अलग अलग गुटों मे बटते हुवे देखा गया, इसका प्रचार किया गया और लोगो को भ्रमित किया गया, कुछ कहानियां सुनाई गई और कुछ कहानियां बनाई गई, स्कूलों में भी सिर्फ विशिष्ट लोगो के बारे में हि पढ़ाया गया, जैसे अपने स्कूलों में गांधीजी के और तिलक जी के कहानियां सुनी होंगी। लेकिन इन सब नामो के साथ साथ और कई नाम येसे है,  जिनके बारे में हमने सुना है लेकिन उनके कार्यों के बारे में चर्चा कम होती है, उन्हे सिर्फ खास मौकों पर याद किया जाता है, लेकिन उनके कार्य अद्वितीय थे और वह भी भारत के रत्न है, लेकिन उनका प्रचार नहीं हुआ इसलिए लोगो तक उनकी विचारधारा, उनकी सिख कम पोहची और लोगो को उनके नाम याद नहीं आते, यह एक प्रकार का प्रचार है। यहां कहानियां सुनाई भी जाती है और कहानियां बनाई भी जाती है। 

  तो आप किस प्रचार माध्यम का पालन करते है? याने सीधा सवाल है के आप किस गुट के है? अलग अलग गुट है तो अलग अलग विचारधारा भी होगी और जहा एक से ज्यादा गुट बनजाते है वहा उन गुटों का कुछ मकसद भी होना चाहिए,तो क्या है आपके गुट का मकसद? आपको यह समझना होगा। में आपसे निवेदन करता हूं के अपने तर्क का इस्तेमाल करे, क्यों के इस दौर में भ्रमित होना एक आम बात हो चुकी है और आपका तर्क ही आपको बचाए रखेगा नहीं तो आप अपना भविष्य खो देंगे, अपनी मान्यताओं को किसी प्रचार माध्यम का गुलाम ना होने दे। ऊपर दिए गए सभी नामो के बारे में अध्ययन करे और सोचिए के क्या गुलामी के दौर में उन्होंने जो अद्वितीय काम किए है वह क्या आप इस आजादी के दौर में कर पाएंगे जहा आपको हर चीज की सहूलियत और साधन है। 

  यह प्रचार माध्यम इतिहास को भावनिक रूप में दिखाते है, लेकिन इतिहास को इतिहास की तरह ही पढ़ना और समझना होगा। अपने मतों को किसी और के नुसार ना बनाए और नहीं किसी और को आपके मतों पर हावी होने दे, आपके अपने मत आपके अपने अध्ययन से और तर्क से होने चाहिए। भावनाओं के आवेश में आकर किसी विचारधारा के गुलाम ना बने।

  प्रचार किसी भी सामान्य को असामान्य बना देता है, इसे दो तरीके से समझते है, पहले आप कुछ बड़ा काम कीजिए और फिर उसका प्रचार कर आपको मानने वालो की सांख्य बढ़ाइए, आपके चाहने वालों की संख्या आपके काम और उसके प्रचार की तीव्रता पर निर्धारित होगी। या आप कुछ बड़ा करने की अपेक्षा कर उसकी इच्छा जताते हुवे आपको सहयोग करने के लिए प्रचार करे अगर आपके प्रचार माध्यम आपको आपके उद्देश्य से बड़ा दिखाने लगे तो आप ही एक उद्देश्य बन जाएंगे, और आपने किए कामों का या जताई हुई इच्छाओं का या वादो को भुला दिया जाएगा और सिर्फ आप पर केंद्रित प्रचार ही आपको कुछ किए बिना ही अद्वितीय बना देगा। हमने यह होते हुवे देखा है, अपने तर्क का इस्तेमाल करे। यहां नायक बनाए जा रहे है, और इनपर किस्से कहानियां बनाई जा रही है, और इसका प्रचार इस तरह से हो रहा है के उनके बताए गए उद्येश्य और उनके असली मकसद मे काफी अंतर था यह देख पाना मुश्किल होता जा रहा है, हम उनके बदलते मकसद के अनुसार अपने मतों को भी बदलते जा रहे है, क्योंकि हमने उन्हें अपना नायक माना है और उनके हर कार्यों को सही या ग़लत के तराजू में तोलना भूल गए क्योंकि हमने अपने तर्क को उनके प्रचार माध्यमों के पास गिरवी रख दिया है। और उनके खिलाफ कुछ बोल नहीं पाते और नाही उनके खिलाफ कुछ सुन पाते है, क्योंकि हमारी मान्यता और हमारे मत उनके द्वारा बनाई गई है। यह उनकी ही देन है। इसलिए मे आपसे निवेदन करता हूं के अपने तर्क का इस्तेमाल करे और अपने अध्ययन शक्ति को बचाए रखीए, नहीं तो आपका भविष्य गुलामी के तरफ बढ़ता हुआ चला जाएगा और आप प्रचारकों के गुलाम होते जाएंगे। यहां कहानियां बनाई जाती है और उसका प्रचार भी होता है।

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